CDP: विकास की अवधारणा और अधिगम के साथ उसका सम्बन्ध नोट्स पार्ट 10
| XIV. संवेगात्मक विकास | ||
| बच्चों के संवेगात्मक विकास को प्रभावित करने वाला कारक है— | स्वास्थ्य एवं शारीरिक विकास, पारिवारिक वातावरण और आपसी संबंध, पास-पड़ोस, समुदाय और समाज | U TET (I-V) 2021 |
| एक शिक्षक विद्यार्थियों को समझाते हैं कि उन्हें दूसरों के दृष्टिकोण से आहत नहीं होना चाहिए बल्कि उनके दृष्टिकोण स्वयं से विपरीत क्यों न हों। वह विद्यार्थियों के जिस पक्ष पर ध्यान दे रहा है— | संवेगात्मक विकास | CG TET (I-V) 09.01.2022 |
| भावनात्मक लगाव को दर्शाता है— | अलग होने की घबराहट | CG TET (I-V) 2016 |
| बच्चे के संवेगात्मक विकास को सबसे कम प्रभावित करने वाला है— | खेलकूद | Haryana TET Paper-I (Class I-V) 2015 |
| संवेगात्मक विकास को प्रभावित करने वाले कारक हैं— | शारीरिक स्वास्थ्य, मानसिक योग्यता, थकान | UP TET Paper-I (Class I-V) 23 Feb 2014 |
| पूर्व बाल्यावस्था में बालक के संवेगात्मक विकास हेतु सर्वाधिक महत्वपूर्ण भूमिका होती है— | माता-पिता की | Haryana TET Paper-I (Class I-V) 2011 |
| “कोई भी नाराज हो सकता है— यह आसान है, परन्तु एक सही व्यक्ति के ऊपर, सही मात्रा में, सही समय पर सही उद्देश्य के लिए तथा सही तरीके से नाराज होना आसान नहीं है।” यह सम्बन्धित है— | संवेगात्मक विकास से | DSSSB PRT UP TET 2015 (I-V) |
| खेल के माध्यम से बालक अपने संवेगों पर नियंत्रण करना सीख जाता है, तो यह विकास कहलाता है— | संवेगात्मक विकास | DSSSB PRT |
| वह परिस्थिति जिसमें बच्चे का संवेगात्मक एवं सामाजिक विकास अच्छा होगा— | जब बच्चे को महत्वपूर्ण माना जाए, उसकी भावनाओं का सम्मान किया जाए | DSSSB PRT UTET 2013 (I-V) |
| व्यापक व्यवहार, दया भावना में वृद्धि व मानसिक स्थिति में उतार-चढ़ाव सम्बन्धित है— | संवेगात्मक विकास की विशेषताओं से | DSSSB PRT |
| बच्चों के संवेगात्मक विकास के लिए सर्वाधिक उपयुक्त है— | कक्षा-कक्ष का प्रजातांत्रिक परिवेश | CTET Paper-I (Class I-V) 22 Feb 2015 DSSSB PRT |
| XV. नैतिक विकास | ||
| बालकों में नैतिक मूल्यों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है— | प्रार्थना सभा, सही समाजीकरण, बुद्धि | H TET (I-V) 2017 |
| विद्यार्थियों में नैतिक मूल्यों का विकास महत्वपूर्ण होता है। हम इस विकास के लिए करना चाहेंगे— | स्वयं को आदर्श के रूप में प्रस्तुत करना | CG TET (VI-VIII) 2017 |
| बच्चों में नैतिकता की स्थापना के लिए सर्वोत्तम मार्ग है— | शिक्षक का आदर्श रूप में व्यवहार करना | UK TET Paper-I (Class I-V) 29 Jan 2011 DSSSB PRT |
| छात्रों में अच्छे नागरिक के गुण, समाहित करने का तरीका होना चाहिए— | उन्हें राष्ट्रीय गानों से परिचित कराकर | Haryana TET Paper-I (Class I-V) 2011 |
| बच्चों के अच्छे चरित्र निर्माण के लिए— | कक्षा-कक्ष गतिविधि इस प्रकार से हो कि बच्चों को चरित्र निर्माण में सहायता मिल सके | DSSSB PRT UKTET-2013 (I-V) |
| चरित्र का विकास होता है— | इच्छाशक्ति द्वारा, व्यवहार एवं आचरण द्वारा, नैतिकता द्वारा | UP TET Paper-II (Class VI-VIII) 13 Nov 2011 |
| सही और गलत की समझ होना, यह .......... विकास का हिस्सा है। | नैतिक | MP TET (VI-VIII) 21 Feb 2019 (9:30 AM) |
| XVI. विकास और अधिगम में सम्बन्ध | ||
| सह-पाठ्यक्रम गतिविधियाँ अधिकतर सम्बन्धित हैं— | छात्रों के सर्वांगीण विकास से | CG TET (VI-VIII) 09.01.2022 |
| विद्यालयों में सह-पाठ्यचर्या गतिविधियाँ आयोजित की जानी चाहिए, क्योंकि— | ये छात्रों के समग्र विकास में सहायक है | H TET (I-V) 2017 |
| निम्न कक्षाओं में शिक्षण की खेल-पद्धति मूल रूप से आधारित है— | विकास एवं वृद्धि के मनोवैज्ञानिक सिद्धांतों पर | Haryana TET (I-V) 2015 UPTET (I-V) 13 November 2011 CTET Paper-I (Class I-V) 26 June 2011 |