CDP: विकास की अवधारणा और अधिगम के साथ उसका सम्बन्ध नोट्स पार्ट 5
| बच्चे का सामाजिक विकास वास्तव में प्रारम्भ होता है— | उत्तर बाल्यावस्था में | Haryana TET Paper-I (Class I-V) 2011 |
| माँ-बाप के साये से बाहर निकलकर अपने साथी बालकों की संगति को पसन्द करना सम्बन्धित है— | उत्तर बाल्यावस्था से | UP TET Paper-I (Class I-V) 27 June 2013 |
| उत्तर बाल्यावस्था को और भी नाम से जाना जाता है— | गिरोहावस्था | HP TET (Arts) Sep. 2018 |
| बेहतर एथलेटिक (शारीरिक) क्षमताएँ, नियमों के साथ खेलों में भागीदारी, तार्किक विचार प्रक्रियाएँ जो ठोस अनुभवों के आसपास केन्द्रित होती हैं, ये ............ अवस्था के लक्षण हैं। | मध्य बचपन | CTET (VI-VIII) 04.01.2022 |
| बाल्यावस्था से अभिप्राय है— | यह एक सामाजिक संरचना है | CTET (VI-VIII) 06.01.2022 |
| वह अवस्था जिसमें बच्चे अपने समवयस्क समूह के सक्रिय सदस्य हो जाते हैं— | बाल्यावस्था | DSSSB PRT C TET 2011 (I-V) UP TET 2011 (VI-VIII) |
| बाल्यावस्था की अवधारणा से अभिप्राय है— | समकालीन सामाजिक-संरचनावादी मनोवैज्ञानिकों के अनुसार यह एक सामाजिक संरचना है | C TET (VI-VIII) 8 Dec. 2019 |
| बच्चों का द्वितीयक समाजीकरण .......... में प्रारम्भ हो जाता है जब वह स्कूल जैसे औपचारिक संस्थानों में जाना शुरू कर देते हैं। | पारिवारिक बाल्यावस्था से | CTET (VI-VIII) 17.01.2022 |
| राघव का शिशु था जब उसे माता-पिता के स्नेह से वंचित रहना पड़ा। बाल्यावस्था के आगे के चरण में उसे बहुत संवेदनशील अध्यापक मिले। फिर भी उसे लोगों पर विश्वास करने में परेशानी होती है और वह जोखिम लेने का साहस नहीं दिखा पाता। राघव के विषय में विकास का जो मुद्दा एकदम स्पष्ट रूप से वर्णित होता है— | आरम्भिक- बाल्य के अनुभवों का मुद्दा | CTET (I-V) 29.12.2021 |
| भाषा अर्जन के सन्दर्भ में संवेदनशील चरण है— | प्रारंभिक बाल्यावस्था | CTET (I-V) 03.01.2022 CTET (I-V) 10.01.2022 |
| खेलों की आयु .......... को कहा जाता है। | पूर्व बाल्यावस्था को | HP TET (Arts) Nov. 2019 |
| वह अवस्था जिसमें प्रतीकात्मक खेल बढ़ता है तथा संज्ञानात्मक विकास को समर्थन देता है— | प्रारंभिक बाल्यावस्था | CTET (V) 07.01.2022 |
| आरंभिक बाल्यकाल का आयु समूह काल होता है— | 2 से 6 वर्ष | H TET (I-V) 11.11.2019 |
| 2 वर्ष से 6 वर्ष की अवधि को कहा जाता है— | प्रारंभिक बचपन | CTET (I-V) 04.01.2022 |
| वह बच्चा जो मध्य बाल्यावस्था में होगा— | एक बच्चा जिसने नियमों के अर्थ को समझ विकसित कर ली है और तर्क कर सकता है | CTET (I-V) 05.01.2022 |
| वह अवस्था जिसमें शारीरिक, मानसिक और व्यक्तित्व का मूलभूत विकास होता है— | बाल्यकाल | HP TET (Arts) Sep. 2017 |
| बच्ची जो मध्य बाल्यावस्था में होगी— | एक बच्ची जो तार्किक रूप से तर्क कर सकती है और संरक्षण कर पाती है | CTET (I-V) 08.01.2022 |
| मध्य बाल्यावस्था की विशेषता है— | बच्चे तार्किक एवं मूर्त रूप से सोचना प्रारंभ कर देते हैं | C TET (VI-VIII) 8 Dec. 2019 |
| लज्जा एवं गर्व का भाव .......... में विकसित होता है। | बाल्यावस्था | Jharkhand TET (VI-VIII) 2016 HP TET (Arts) Feb. 2013 |
| एक बच्चे में रचनात्मक (Constructive) विकास प्रारम्भ होता है— | बाल्यावस्था के दौरान | Jharkhand TET (I-V) 2012 |
| बालक द्वारा लम्बे समय तक रोने पर भी पिता द्वारा खिलौना न देने का परिणाम होगा— | प्रत्यावर्तन | HP TET (I-V) 2018 |
| बालक की वह अवस्था जिसमें हँसता कम है और मुस्कुराता ज्यादा है जिसका अर्थ है कि अपने संवेगों को नियंत्रित करना सीख जाता है— | उत्तर बाल्यकाल | HP TET (Arts) Sep. 2017 |
| बाल्यावस्था का लक्षण है— | सामाजिक संकल्पना | H TET (I-V) 2017 |
| उत्तर बाल्यावस्था में बालक भौतिक वस्तुओं के किस तत्व में परिवर्तन को समझने लगता है— | द्रव्यमान, संख्या और क्षेत्र | CG TET (I-V) 2017 CG TET (I-V) 2016 |
| रॉस के अनुसार विकास की वह अवस्था जिसको ‘मिथ्या परिपक्वता काल’ कहा गया है— | बाल्यावस्था | H TET (I-V) 11.11.2019 |
| मूर्त परिस्थितियों के माध्यम से समझने लग जाना .......... अवस्था से सम्बन्धित है। | बाल्यावस्था में बौद्धिक विकास | CG TET (I-V) 09.01.2022 |
